21 अगस्त 2009

मेरा मन

बारिश में क्यों झूमता है मन, इस मौसम में क्यों तड़पता है मन
पानी की बुँदे भी गोलियों सी लगती है,हर बूंदों से आहत होता है मन
समुन्दर सा अशांत क्यों होता है मन,झील सा गहरा क्यों होता है मन
लहरों के किनारे जब भी आता है,अकेले में बैठ के रोता है मन

6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब।

    हर मन का उच्चारण है।
    मन उलझन का कारण है।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  2. बहुत ही अच्छा लिखा है आपने.

    चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.

    गुलमोहर का फूल

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  3. Aapka swagat hai... isi tarah likhte rahiye...

    http://hellomithilaa.blogspot.com
    Mithilak Gap...Maithili Me

    http://mastgaane.blogspot.com
    Manpasand Gaane

    http://muskuraahat.blogspot.com
    Aapke Bheje Photo

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