12 अक्तूबर 2009

ऐसा क्यों हुआ कि
मैं उब गया हर किसी से
इनसे भी उनसे भी,अपनों से,गैरों से
यहाँ तक कि आपने आप से
भी अब लगता है डर
हर सुबह निकलता हूँ
रात लौट आता हूँ फ़िर भी
खोज नही पाता हूँ मैं अपना घर
बोलूं या चुप रहूँ
निर्णय नही कर पाता हूँ
टालता हूँ आज को कल पर
इसी अंतर्द्वंद की स्थिति में
आज को बिताता हूँ
इस अनिर्णय कि स्थिति से
आख़िर उबरना होगा
इस तरफ़ या उस तरफ़
किसी तरफ़ तो बढ़ना होगा ...

1 टिप्पणी:

  1. बिल्कुल सही कहा आपने…
    कोई न कोई निर्णय तो लेने ही होगा…बढना ही होगा किसी न किसी तरफ़्।

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