
भाजपा के कई तथाकथित नेतागणों ने बहुत इधर उधर फ़ोन घुमाया लेकिन अधिकारीयों ने जैसे कमर कस ली थी चलो आम आदमी को कुछ तो राहत मिली होगी और वो ऐसे व्यापारियों को जम कर कोस रही होगी
चंडूखाने में अभी इतना ही....

ये योजना देश के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशो में उपलब्ध है जो राज्य या संघ शासित प्रदेश योजना में शामिल होने का विकल्प चुनते है उन्हें योजना में शामिल की जाने वाली फसलो की सूची तैयार करनी होती है
अधिसूचित क्षेत्रो में अधिसूचित फसल उगने वाले सभी किसान ,बटाईदार किरायेदार शामिल है
इसमे वो किसान भी आते है जो विभिन्न वित्तीय संस्थाओ से कर्ज ले कर खेती कर रहे हैं निम्नलिखित खतरों के कारण फसल बीमे की जरुरत पड़ी आग, आंधी ,भूकंप ,बाढ़ ,सुखा ,कीट ,बीमारी लेकिन युद्घ, परमाणु युद्घ ,ग़लत नीयत तथा अन्य नियंत्रण योग्य खतरों से हुए नुक्सान को इससे से बाहर रखा गया
बीमित राशिः के कवरेज की सीमा- बीमित किसान के विकल्प से सकल उत्पाद बीमा राशिः को बढाया जा सकता है ये कीमत १५० प्रतिशत तक जा सकती है शर्त यही है की फसल अधिसूचित हो और किसान वाणिज्यिक दर पर प्रीमियम का भुगतान करने को राजी हो .कर्जदार किसानों के मामले में बीमित राशि फसल के लिए ली गयी अग्रिम राशि के बराबर हो.
प्रीमियम की राशिः -खरीफ की फसलो बाजरा व तिलहन के लिए कुल बीमा धन का ३.५% या वास्तविक जो कम हो ,अनाज या दाल के लिए कुल बीमा धन का २.५% या वास्तविक जो कम हो
रबी की फसल के लिए - गेंहू के लिए बीमा धन का १.५% या वास्तविक जो कम हो अन्य फसल (अनाज व दाल) के लिए बीमित राशिः का २% या वास्तविक जो कम हो
लघु या सीमान्त किसानो को प्रीमियम में ५०% तक का अनुदान दिया जाता है
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