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24 अगस्त 2009

13aug की खबर का असर 24 aug को दिखा


१३ अगस्त को छपी पोस्ट का असर अब दिखने लगा है जिले में अब जगह जगह छापामारी अभियान चलने लगा है २३ तारीख को राजनांदगांव के मुंदडा दाल मिल में कई टिन तेल जब्त किया गया तथा आज २४ तारीख को उठने के साथ ही ये अच्छी खबर सुनने को मिली दुर्ग में १.५ करोड़ की दाल बरामद की गयी, भला हो खाद्दान विभाग का जिसे देर से ही सही लेकिन सही बुद्धि तो आई हालांकि इस केस को दबाने की बहुत कोशिश की गयी
भाजपा के कई तथाकथित नेतागणों ने बहुत इधर उधर फ़ोन घुमाया लेकिन अधिकारीयों ने जैसे कमर कस ली थी चलो आम आदमी को कुछ तो राहत मिली होगी और वो ऐसे व्यापारियों को जम कर कोस रही होगी

चंडूखाने में अभी इतना ही....

मेरी पोस्ट चोरी हो गयी

दोस्तों राम राम
चंडूखाने से एक खबर आई है की २७-५-०९ को छपी "जिन्दा लाशों की बस्ती" नामक एक पोस्ट चोरी हो गयी है
चंडूखाने के जासूस पूरी सरगर्मी से तलाश कर रहे हैं पुलिस भी कागजी खाना पूर्ति करके जगजाहिर जवाब दे चुकी है खोजने वाले को एक सिंगल समोसा और हाफ चाय इनाम में दी जायेगी, इतने बड़े इनाम की अभी तक किसी ने घोषणा नहीं की थी वैसे ब्लोगर सूत्रों से पता चला है की ये http://www.fundoozone.com/forums/showthread.php?t=23318
में आखरी बार देखी गयी थी, और ज्यादा साक्ष जुटाने के लिए http://copyscape.com की मदद ली जा रही है वैसे अब पोस्ट में ताला लगा दिया गया है लेकिन "अब पछतात होत का जब चिडिया चुग गयी खेत"

09 अगस्त 2009

क्या करें साला सिलेंडर महंगा हो गया

अब तो ऐसा लगने लगा है कि हमारे देश में आने वाली पीढियों को सायकल और बैलगाडियों का मुंह देखना पड़ेगा क्योंकि इतने तेजी से हम अपने प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने में लगे हुए हैं कि आने वाले कुछ सालों में पेट्रोल, सिलेंडर, डीज़ल, का रेट इतना बढ़ जायेगा कि

21 मई 2009

दोस्तों राम राम
आज बहुत दिनों बाद लिख रहा हूँ अब आप कारण पूछेंगे तो पहला कारण तो ये है कि एक तो हमें समय नही मिला और जब समय मिला तो हमें जाना पड़ा लख्ननऊ खैर ये सब तो चलता रहेगा
आज मैं आपको और किसान भाइयो को फसल बीमा के बारे में बताता हूँ हालाँकि ये सब बताने वाले तो बहुत हैं लेकिन कौन बताये के चक्कर में कोई नही आता यही कुर्सी का काम है ये कुर्सी भी आदमी को निकम्मा बना देती है या तो निकम्मों को कुर्सी मिल गई है
तो जानिए फसल बीमा के बारे में :-पहले जान लेते है कि फसल बीमा क्या होता है
१.किसी भी आपदा से होने वाली फसलीय हानि कि स्थिति में किसान के नुकसान की भरपाई के लिए राष्ट्रीय कृषि योजना कि स्थापना की गई .
इस योजना के निम्न उद्देश्य हैं
  • प्राकृतिक आपदा, कीट या बीमारी से बरबाद होने वाली अधिसूचित फसलो को बीमा का लाभ और वित्तीय समर्थन देना
  • किसानो को खेती के हाई टेक तरीको को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना

ये योजना देश के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशो में उपलब्ध है जो राज्य या संघ शासित प्रदेश योजना में शामिल होने का विकल्प चुनते है उन्हें योजना में शामिल की जाने वाली फसलो की सूची तैयार करनी होती है

अधिसूचित क्षेत्रो में अधिसूचित फसल उगने वाले सभी किसान ,बटाईदार किरायेदार शामिल है

इसमे वो किसान भी आते है जो विभिन्न वित्तीय संस्थाओ से कर्ज ले कर खेती कर रहे हैं निम्नलिखित खतरों के कारण फसल बीमे की जरुरत पड़ी आग, आंधी ,भूकंप ,बाढ़ ,सुखा ,कीट ,बीमारी लेकिन युद्घ, परमाणु युद्घ ,ग़लत नीयत तथा अन्य नियंत्रण योग्य खतरों से हुए नुक्सान को इससे से बाहर रखा गया

बीमित राशिः के कवरेज की सीमा- बीमित किसान के विकल्प से सकल उत्पाद बीमा राशिः को बढाया जा सकता है ये कीमत १५० प्रतिशत तक जा सकती है शर्त यही है की फसल अधिसूचित हो और किसान वाणिज्यिक दर पर प्रीमियम का भुगतान करने को राजी हो .कर्जदार किसानों के मामले में बीमित राशि फसल के लिए ली गयी अग्रिम राशि के बराबर हो.

प्रीमियम की राशिः -खरीफ की फसलो बाजरा व तिलहन के लिए कुल बीमा धन का ३.५% या वास्तविक जो कम हो ,अनाज या दाल के लिए कुल बीमा धन का २.५% या वास्तविक जो कम हो

रबी की फसल के लिए - गेंहू के लिए बीमा धन का १.५% या वास्तविक जो कम हो अन्य फसल (अनाज व दाल) के लिए बीमित राशिः का २% या वास्तविक जो कम हो

लघु या सीमान्त किसानो को प्रीमियम में ५०% तक का अनुदान दिया जाता है

ज्यादा जानकारी के लिए इस लिंक में क्लिक कीजिये

http://www.indg.in

21 अप्रैल 2009

दुःख

मैं सोचता हुं कि हमारे जीवन में समस्या नही होती तो क्या होता? क्या आप ऐसे जीवन की कल्पना कर सकते हैं
जिसमें कोई दुःख नही है वैसे देखा जाए तो दुःख के बिना जीना सम्भव ही नही है अगर समस्या नही होती तो तो हम क्या करते बस ऐसे ही बेजान पुतले की तरह जीते रहते .समस्या हमें जिंदगी से जूझने का अवसर देती है वो बोलती है की मैं तुमपे भारी आप समस्या को बोलते है की मैं तुझ पे भारी, बस इसी तरह जिन्दगी का एक पल गुजर जाता है और एक सुखी पल का एहसास आता है हमारे जीवन में, इस एहसास को हम सीने से लगाये रखते हैं ताउम्र, यही एक चीज़ है जो हमें जीना सिखाती है,जिंदगी के हर मोड़ पर लड़ना सिखाती है आने वाले दुःख को कैसे झेलना है, बताती है. दुःख कि चिंगारी बार बार हमारे जीवन में आग लगाती है और हम फिर से आने वाले सुख के लिए इससे लड़ने के लिए तैयार रहते है ऐसे में मुझे बाजीगर का वो डायलाग याद आ जाता है कि "बार-बार हार कर जीतने वाले को बाजीगर कहते है"
इसलिए लड़िये और लड़िये जब तक आप जीत ना जायें

10 अप्रैल 2009

सरकारी अस्पताल

दोस्तों,
नमस्कार
क्या लिखू दो तीन दिनों से समझ नही आ रहा था लेकिन जब आज जिला अस्पताल गया तो ऐसा लगा कि और कुछ लिख ही नही सकता क्यो कि जब मैंने वहा अपना कदम रखा तो ऐसा लगा कि लोग वहा पर मरीजों कि जान के साथ जिस प्रकार खिलवाड़ कर रहे थे जैसे वो इंसान नही कोई प्रयोग करने कि चीज़ हो, और तो और कमीशन खोरी का ऐसा नंगा नाच कही नही देखा,ये हाल है छत्तीसगढ़ राज्य के राजनांदगांव शहर का,यहाँ के डाक्टर महंगी से महंगी दवाई सिर्फ़ इसलिए नही लिखते कि मरीज़ कि जान बच जाए बल्कि इसलिए लिखते है कि उनका ज्यादा से ज्यादा कमीशन बन सके,उस पर आलम ये कि जिस मरीज़ को जो डाक्टर देख रहा है उसको वही देखेगा दूसरा डाक्टर तो हाथ नही लगा सकता भले ही मरीज़ मर जाए .अरे जनाब उसका तो एक ही कारण हो सकता है दूसरा डाक्टर दवाई लिखेगा तो पहले डाक्टर का कमीशन मार नही खा जाएगा सीधी सी बात है भाई दाल रोटी कहाँ से चलेगी ,खैर मैं तो सर पर पैर रख कर भगा और यही सोचता गया कि जो लोग बेचारे गाँव से इलाज़ कराने आते होंगे वो कैसे करते होंगे?सब कुछ चूस लेने के बाद उनको रिफ़र कर दिया जाता है बड़े अस्पतालों कि और ,और उसका भी कमीशन ले लेते होंगे उन अस्पतालों से.
राम राम फिर कोई अजब चीज़ देखने में आएगी तो आप लोगो को जरुर बताऊंगा.